ब्रेकिंग
Border 2 आज सिनेमाघरों में रिलीज़ — सनी देओल, वरुण धवन, दिलजीत की बड़ी फिल्म IND vs ZIM: श्रेयस अय्यर की कप्तानी में पहला T20 आज हरारे में NEET पेपर लीक: संसद में आज भी हंगामे के आसार, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग सेंसेक्स 715 अंक लुढ़का, निफ्टी 24,000 के नीचे बंद — FII बिकवाली जारी असम में बाढ़ का कहर — एक दिन में 21 मौतें, मृतकों की संख्या 31 पहुँची Border 2 आज सिनेमाघरों में रिलीज़ — सनी देओल, वरुण धवन, दिलजीत की बड़ी फिल्म IND vs ZIM: श्रेयस अय्यर की कप्तानी में पहला T20 आज हरारे में NEET पेपर लीक: संसद में आज भी हंगामे के आसार, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग सेंसेक्स 715 अंक लुढ़का, निफ्टी 24,000 के नीचे बंद — FII बिकवाली जारी असम में बाढ़ का कहर — एक दिन में 21 मौतें, मृतकों की संख्या 31 पहुँची
23 जुलाई 2026 · नई दिल्लीई-पेपरलॉगिन
ख़बरें, विषय, लेखक, वीडियो खोजें…खोजें
भारतदुनियाराजनीतिकारोबारटेक्नोलॉजीखेलमनोरंजनलाइफस्टाइलसेहतशिक्षाऑटो
लाइव टीवीलाइव टीवीभारतभारतदुनियादुनियाराजनीतिराजनीतिकारोबारकारोबारटेक्नोलॉजीटेक्नोलॉजीखेलखेलमनोरंजनमनोरंजनलाइफस्टाइललाइफस्टाइलसेहतसेहतशिक्षाशिक्षाऑटोऑटो
दुनिया

अमेरिका-ईरान तनाव चरम पर: होर्मुज जलडमरूमध्य संकट से तेल बाजार में हलचल

दुनिया के 20% तेल के रास्ते पर खतरा, टैंकरों पर हमले से वैश्विक चिंता बढ़ी

अमेरिका-ईरान तनाव चरम पर: होर्मुज जलडमरूमध्य संकट से तेल बाजार में हलचल

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है और इसका सबसे खतरनाक असर होर्मुज जलडमरूमध्य पर दिख रहा है, जहां से दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल की सप्लाई गुजरती है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दोनों देशों के बीच युद्धविराम टूटने के बाद खाड़ी क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं और दुनिया के सबसे व्यस्त तेल मार्गों में शुमार यह संकरा समुद्री रास्ता अब एक बड़े वैश्विक संकट का केंद्र बन गया है। हालात की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 17 से 19 जुलाई के बीच इस रास्ते से सिर्फ 30 जहाज ही गुजरे, जो सामान्य दिनों की आवाजाही के मुकाबले बेहद कम है। शिपिंग कंपनियां जोखिम देखते हुए या तो अपने जहाज रोक रही हैं या वैकल्पिक इंतजामों पर विचार कर रही हैं। इसी बीच ग्रीक शिपिंग कंपनी डायनाकॉम के दो टैंकरों पर ओमान तट के पास प्रोजेक्टाइल हमलों की खबर ने पूरे समुद्री कारोबार में दहशत फैला दी है। इन सबका सीधा असर तेल बाजार पर पड़ा है। ब्रेंट क्रूड की कीमतें लगातार चढ़ते हुए जुलाई 2022 के उच्चतम स्तर की ओर बढ़ रही हैं। तेल का यह उबाल सिर्फ ऊर्जा बाजार की खबर नहीं है, बल्कि दुनियाभर की महंगाई, व्यापार और आम आदमी की जेब से जुड़ा मामला है। भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए तो यह संकट और भी गंभीर चिंता का विषय बन गया है। युद्धविराम टूटने के बाद बिगड़े हालात मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच बना युद्धविराम टूटने के बाद क्षेत्र में हालात तेजी से बिगड़े हैं। दोनों पक्षों की ओर से सख्त बयानबाजी और सैन्य तैयारियों की खबरें लगातार आ रही हैं। खाड़ी में मौजूद सैन्य बेड़ों की हलचल बढ़ गई है और आसपास के देश भी हाई अलert पर हैं। युद्धविराम टूटने का सबसे बड़ा नुकसान भरोसे का है। कूटनीति की मेज पर लौटने की कोशिशें कमजोर पड़ी हैं और हर छोटी घटना के बड़े टकराव में बदलने का खतरा बढ़ गया है। जानकारों का कहना है कि मौजूदा माहौल में गलतफहमी से भी बड़ा संकट खड़ा हो सकता है, क्योंकि इतने संवेदनशील इलाके में एक चिंगारी भी काफी होती है। क्षेत्र के देशों की चिंता यह है कि टकराव लंबा खिंचा तो इसकी आर्थिक और मानवीय कीमत सबको चुकानी पड़ेगी। यही वजह है कि दुनियाभर से संयम बरतने की अपीलें की जा रही हैं, लेकिन जमीन पर तनाव कम होने के संकेत फिलहाल नजर नहीं आ रहे। होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों इतना अहम होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला संकरा समुद्री रास्ता है। इसकी सबसे बड़ी अहमियत यह है कि दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल की सप्लाई इसी रास्ते से होती है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात, कतर और ईरान जैसे बड़े ऊर्जा उत्पादक देशों का तेल और गैस इसी गलियारे से होकर दुनिया के बाजारों तक पहुंचता है। इस रास्ते की भौगोलिक बनावट ही इसे बेहद संवेदनशील बनाती है। संकरे जलमार्ग से गुजरते विशाल टैंकर किसी भी टकराव की स्थिति में आसान निशाना बन सकते हैं। यही वजह है कि जब भी खाड़ी में तनाव बढ़ता है, दुनियाभर के ऊर्जा बाजारों की धड़कनें तेज हो जाती हैं। इस रास्ते का कोई पूरा विकल्प मौजूद नहीं है, कुछ पाइपलाइनें सीमित मात्रा में ही तेल बाहर पहुंचा सकती हैं। जानकार बताते हैं कि होर्मुज जलडमरूमध्य सिर्फ तेल ही नहीं, एलएनजी यानी तरल प्राकृतिक गैस की सप्लाई के लिए भी बेहद अहम है। एशिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इसी रास्ते पर निर्भर हैं। ऐसे में यहां कोई भी रुकावट पूरी वैश्विक ऊर्जा व्यवस्था को हिला सकती है। तीन दिन में सिर्फ 30 जहाजों की आवाजाही तनाव का सबसे ठोस सबूत जहाजों की घटती आवाजाही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार 17 से 19 जुलाई के बीच होर्मुज के रास्ते सिर्फ 30 जहाज गुजरे, जबकि सामान्य दिनों में यह संख्या कहीं ज्यादा रहती है। यह गिरावट बताती है कि शिपिंग कंपनियां किस कदर डरी हुई हैं और जोखिम लेने से बच रही हैं। जहाजों की आवाजाही घटने का सीधा मतलब है सप्लाई में देरी। तेल और गैस के शिपमेंट समय पर नहीं पहुंचेंगे तो खरीदार देशों के भंडार पर दबाव बढ़ेगा और बाजार में कीमतें और चढ़ेंगी। कई शिपिंग कंपनियों ने अपने जहाजों को सुरक्षित इलाकों में रोककर हालात पर नजर रखने की रणनीति अपनाई है, जिससे माल ढुलाई का पूरा शेड्यूल गड़बड़ा गया है। समुद्री व्यापार के जानकारों का कहना है कि ऐसी अनिश्चितता लंबी खिंची तो इसका असर सिर्फ ऊर्जा ही नहीं, दूसरे कार्गो पर भी पड़ेगा। कंटेनर शिपिंग, केमिकल्स और खाद्य वस्तुओं की ढुलाई भी इसी क्षेत्र से जुड़ी है, इसलिए संकट का दायरा लगातार फैल सकता है। टैंकरों पर हमलों से गहराई दहशत इस संकट को सबसे ज्यादा भड़काने वाली घटना ओमान तट के पास हुई, जहां ग्रीक शिपिंग कंपनी डायनाकॉम के दो टैंकरों पर प्रोजेक्टाइल हमले हुए। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इन हमलों ने साफ कर दिया कि खतरा अब सिर्फ आशंका नहीं रहा, बल्कि व्यापारिक जहाज सीधे निशाने पर आ चुके हैं। व्यापारिक जहाजों पर हमले अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के लिहाज से बेहद गंभीर माने जाते हैं। ऐसे हमलों के बाद बीमा कंपनियां जोखिम प्रीमियम बढ़ा देती हैं, नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ जाती है और कई कंपनियां उस रूट से किनारा कर लेती हैं। यही सब अभी होता दिख रहा है, जिससे पूरे क्षेत्र का समुद्री व्यापार सहम गया है। जहाजों पर काम करने वाले हजारों नाविकों की सुरक्षा भी बड़ा सवाल है, जिनमें बड़ी संख्या में भारतीय भी शामिल होते हैं। शिपिंग उद्योग से जुड़े संगठनों ने चालक दल की हिफाजत के पुख्ता इंतजाम और सुरक्षित गलियारों की मांग तेज कर दी है। तेल की कीमतों में लगातार उबाल तनाव की सीधी परछाई तेल की कीमतों पर पड़ी है। ब्रेंट क्रूड 96 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल चुका है और कीमतें जुलाई 2022 के उच्चतम स्तर की ओर बढ़ रही हैं। बाजार को डर है कि अगर होर्मुज के रास्ते सप्लाई और घटी, तो कीमतों में तेज उछाल आ सकता है। तेल बाजार के जानकार बताते हैं कि मौजूदा कीमतों में जोखिम प्रीमियम पहले से जुड़ चुका है, यानी सिर्फ आशंका के आधार पर ही कीमतें ऊपर चढ़ी हैं। अगर कोई बड़ी घटना होती है तो यह प्रीमियम और बढ़ेगा, और अगर तनाव घटता है तो कीमतों में तेज गिरावट भी आ सकती है। फिलहाल बाजार हर खबर पर झूल रहा है और अस्थिरता चरम पर है। वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराता खतरा महंगा तेल पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए खतरे की घंटी है। ऊर्जा की ऊंची लागत से माल ढुलाई, उत्पादन और बिजली तक सब महंगा होता है, जिससे महंगाई बढ़ती है। कई बड़े देशों के केंद्रीय बैंक महंगाई को काबू करने की लंबी लड़ाई के बाद ब्याज दरों में राहत की ओर बढ़ रहे थे, लेकिन तेल का यह उबाल उनकी योजनाओं पर पानी फेर सकता है। इतिहास गवाह है कि तेल संकट अक्सर वैश्विक मंदी की आहट लेकर आते हैं। अगर ऊर्जा की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहीं, तो उपभोक्ता खर्च घटेगा, कंपनियों के मुनाफे दबेंगे और आर्थिक विकास की रफ्तार धीमी पड़ेगी। यही वजह है कि दुनियाभर के नीति-निर्माता खाड़ी के घटनाक्रम को सांस थामे देख रहे हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य और भारत की चिंता भारत के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य का संकट सीधे तौर पर ऊर्जा सुरक्षा का मामला है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल आयात करता है और इसका बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से इसी रास्ते होकर आता है। सप्लाई में रुकावट या कीमतों में उछाल, दोनों ही सूरतों में भारत का आयात बिल तेजी से बढ़ेगा। महंगे तेल का असर भारत में कई स्तरों पर दिखता है। व्यापार घाटा बढ़ता है, रुपये पर दबाव आता है और सरकारी खजाने का गणित बिगड़ता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार भारतीय रिफाइनरी कंपनियां हालात पर लगातार नजर रखे हुए हैं और वैकल्पिक स्रोतों से सप्लाई के इंतजाम भी तलाशे जा रहे हैं ताकि किसी भी स्थिति से निपटा जा सके। खाड़ी क्षेत्र में काम करने वाले लाखों भारतीयों की सुरक्षा और उनकी ओर से भेजी जाने वाली कमाई भी भारत के लिए अहम पहलू है। तनाव बढ़ने की स्थिति में इन सब मोर्चों पर असर पड़ सकता है, इसलिए भारत की कूटनीति फूंक-फूंककर कदम रख रही है। पेट्रोल डीजल और महंगाई का गणित आम आदमी के लिए इस संकट का सबसे सीधा मतलब पेट्रोल-डीजल की कीमतों से है। कच्चा तेल महंगा होने पर तेल कंपनियों की लागत बढ़ती है और खुदरा कीमतों पर दबाव आता है। डीजल महंगा होते ही माल ढुलाई महंगी होती है, जिससे सब्जी, अनाज, दूध जैसी रोजमर्रा की चीजों के दाम भी चढ़ने लगते हैं। महंगाई का यह सिलसिला यहीं नहीं रुकता। हवाई ईंधन महंगा होने से हवाई किराए बढ़ सकते हैं, एलपीजी और पेंट से लेकर प्लास्टिक तक पेट्रोलियम से जुड़े तमाम उत्पादों की लागत बढ़ती है। जानकारों का कहना है कि अगर क्रूड लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर टिका रहा, तो इसका असर धीरे-धीरे पूरी अर्थव्यवस्था में फैल जाएगा और आरबीआई के लिए ब्याज दरों में राहत देना मुश्किल हो जाएगा। कूटनीतिक कोशिशें कहां तक पहुंचीं संकट गहराने के साथ ही कूटनीतिक हलचल भी तेज हो गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कई देश और अंतरराष्ट्रीय संगठन दोनों पक्षों से तनाव घटाने की अपील कर रहे हैं। समुद्री रास्तों की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय समन्वय बढ़ाने की कोशिशें भी चल रही हैं, ताकि व्यापारिक जहाजों की आवाजाही सुरक्षित की जा सके। भारत ने भी हालात पर गहरी नजर बनाए रखी है और सभी पक्षों से बातचीत के जरिए मसले सुलझाने की अपील की है। भारत के खाड़ी के देशों के साथ भी और पश्चिमी देशों के साथ भी संतुलित रिश्ते हैं, इसलिए जानकार मानते हैं कि तनाव घटाने की किसी भी पहल में भारत की भूमिका अहम हो सकती है। आगे क्या आने वाले दिनों में सबकी निगाहें इस बात पर रहेंगी कि होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही सामान्य होती है या हालात और बिगड़ते हैं। युद्धविराम बहाल करने की कोई भी ठोस पहल तेल बाजार को तुरंत राहत दे सकती है, जबकि कोई भी नई सैन्य घटना कीमतों को नए शिखर पर पहुंचा सकती है। यही अनिश्चितता इस संकट को इतना खतरनाक बनाती है। भारत के नजरिये से आने वाला समय सतर्कता का है। सरकार, तेल कंपनियां और रिजर्व बैंक तीनों को कीमतों, सप्लाई और रुपये पर लगातार नजर रखनी होगी। आम लोगों के लिए फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन यह समझना जरूरी है कि खाड़ी के इस संकरे समुद्री रास्ते की हलचल का असर सीधे उनकी रसोई और जेब तक पहुंच सकता है। दुनिया उम्मीद कर रही है कि हथियारों की जगह बातचीत को मौका मिलेगा।

Rohit Sharma
Journalist · The Inside Journal
सच्चाई सामने लाने और पाठकों तक असरदार ख़बरें पहुँचाने के प्रति समर्पित।
प्रोफ़ाइल देखें
संबंधित ख़बरें