कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: रिशिकांत सिंह ने भारोत्तोलन में दिलाया भारत को पहला सिल्वर, स्नैच में बनाया नया गेम्स रिकॉर्ड
ग्लासगो में जारी कॉमनवेल्थ गेम्स के तीसरे दिन भारतीय भारोत्तोलक रिशिकांत सिंह ने पुरुषों के 60 किग्रा वर्ग में रजत पदक जीतकर देश का खाता खोला, वहीं झंडू कुमार पहले ही पैरा पावरलिफ्टिंग में कांस्य दिला चुके थे।

ग्लासगो: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के तीसरे दिन भारतीय खेमे में जश्न का माहौल तब बना, जब युवा भारोत्तोलक रिशिकांत सिंह ने पुरुषों के 60 किलोग्राम भार वर्ग में रजत पदक अपने नाम किया। यह इन खेलों में भारत का पहला भारोत्तोलन पदक है और इसने पूरे देश की उम्मीदों को नई ऊर्जा दे दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक रिशिकांत ने स्नैच वर्ग में 121 किलोग्राम का वजन उठाकर एक नया कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड भी कायम किया, जिसने स्टेडियम में मौजूद दर्शकों को खड़े होकर तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया।
यह प्रदर्शन ऐसे समय आया है जब भारतीय दल धीरे-धीरे पदक तालिका में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में जुटा है। तीसरे दिन की शुरुआत तक भारत के खाते में सिर्फ एक पदक था, लेकिन रिशिकांत की इस उपलब्धि ने न सिर्फ पदकों की संख्या बढ़ाई, बल्कि आने वाले मुकाबलों के लिए मनोबल भी ऊंचा कर दिया।
एक नए सितारे का उदय रिशिकांत सिंह उन खिलाड़ियों में से हैं जिन्होंने पिछले कुछ वर्षों में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में लगातार सुधार दिखाया है। 60 किग्रा वर्ग में प्रतिस्पर्धा बेहद कड़ी रहती है, क्योंकि इसमें ताकत के साथ-साथ तकनीक और संयम का भी उतना ही महत्व होता है। स्नैच में 121 किग्रा का रिकॉर्ड लिफ्ट इस बात का प्रमाण है कि रिशिकांत ने बड़े मंच पर दबाव को अवसर में बदलना सीख लिया है। भारोत्तोलन में स्नैच और क्लीन एंड जर्क दोनों का कुल योग ही अंतिम पदक तय करता है, और विशेषज्ञों के अनुसार रिशिकांत की तकनीकी परिपक्वता उनकी सबसे बड़ी ताकत है।
झंडू कुमार ने खोला था खाता इससे पहले भारत का पहला पदक पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार ने दिलाया था। रिपोर्ट्स के अनुसार झंडू ने पुरुषों के हैवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग फाइनल में 190 किलोग्राम की बेस्ट लिफ्ट के साथ कांस्य पदक जीता। यह पदक इसलिए भी खास रहा क्योंकि इसने भारत के अभियान की शुरुआत सकारात्मक नोट पर की और यह संदेश दिया कि भारतीय पैरा-एथलीट भी मुख्यधारा के खिलाड़ियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर देश का नाम रोशन कर रहे हैं।
पदक तालिका में भारत की स्थिति आधिकारिक जानकारी के मुताबिक तीसरे दिन के समापन तक, यानी रिशिकांत के रजत से ठीक पहले, भारत एक कांस्य पदक के साथ पदक तालिका में दसवें स्थान पर था। रजत पदक जुड़ने के बाद भारत की स्थिति में सुधार की उम्मीद है। हालांकि खेलों के अभी कई दिन बाकी हैं और भारतीय दल के पास तालिका में ऊपर चढ़ने के भरपूर मौके हैं। भारोत्तोलन, कुश्ती, मुक्केबाजी और एथलेटिक्स जैसे खेलों में भारत की परंपरागत मजबूती को देखते हुए आने वाले दिनों में पदकों की झड़ी लगने की संभावना जताई जा रही है।
122 एथलीट, दस खेल कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का आयोजन स्कॉटलैंड के ग्लासगो शहर में 23 जुलाई से 2 अगस्त के बीच किया जा रहा है। इस बार भारतीय दल में 122 एथलीट शामिल हैं जो दस अलग-अलग खेलों में देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। पिछले संस्करणों की तुलना में इस बार खेलों का स्वरूप थोड़ा सीमित रखा गया है, जिससे कुछ खेल कार्यक्रम से बाहर हो गए हैं। इसके बावजूद भारतीय खिलाड़ी उन खेलों में मजबूत दावेदारी पेश कर रहे हैं जिनमें देश की ऐतिहासिक पकड़ रही है।
भारोत्तोलन हमेशा से भारत के लिए पदकों का भरोसेमंद स्रोत रहा है। बीते कुछ संस्करणों में भारतीय भारोत्तोलकों ने एक के बाद एक पदक जीतकर देश को गौरवान्वित किया है, और रिशिकांत सिंह का यह प्रदर्शन उसी परंपरा को आगे बढ़ाता है।
आगे क्या रिशिकांत के पदक के बाद देश की निगाहें अब बाकी भारोत्तोलकों और अन्य खेलों के मुकाबलों पर टिक गई हैं। खासकर स्टार भारोत्तोलक मीराबाई चानू का मुकाबला पूरे देश के लिए भावनात्मक क्षण बनने वाला है, क्योंकि वह लगातार तीसरा कॉमनवेल्थ स्वर्ण जीतने की दहलीज पर खड़ी हैं। इसके अलावा मुक्केबाजी, कुश्ती और एथलेटिक्स में भी भारतीय दल से कई पदकों की उम्मीद है।
खेल प्रेमियों के लिए यह दौर बेहद रोमांचक है। हर सुबह नए मुकाबले, नई उम्मीदें और तिरंगे के ऊंचा लहराने के नए मौके लेकर आ रही है। रिशिकांत सिंह का यह रजत सिर्फ एक पदक नहीं, बल्कि उस मेहनत, अनुशासन और जुनून का प्रतीक है जो हर भारतीय एथलीट अपने साथ मैदान में उतरता है।
द इनसाइड जर्नल की टीम ग्लासगो से जुड़ी हर बड़ी अपडेट पर लगातार नज़र रखे हुए है। जैसे-जैसे भारतीय दल का अभियान आगे बढ़ेगा, हम आपको हर पदक, हर रिकॉर्ड और हर ऐतिहासिक पल की सबसे तेज़ और भरोसेमंद जानकारी देते रहेंगे।

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