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26 जुलाई 2026 · नई दिल्लीई-पेपरलॉगिन
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बड़ी खबर: धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री पद से दिया इस्तीफा, NEET-UG पेपर लीक पर 37 दिन के छात्र आंदोलन के आगे झुकी सरकार

परीक्षा पेपर लीक और अनियमितताओं को लेकर देशभर में भड़के छात्र आंदोलन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। जंतर-मंतर पर 37 दिनों से चल रहा युवाओं का प्रदर्शन आखिरकार रंग लाया।

बड़ी खबर: धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री पद से दिया इस्तीफा, NEET-UG पेपर लीक पर 37 दिन के छात्र आंदोलन के आगे झुकी सरकार
परीक्षा पेपर लीक और अनियमितताओं को लेकर देशभर में भड़के छात्र आंदोलन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। जंतर-मंतर पर 37 दिनों से चल रहा युवाओं का प्रदर्शन आखिरकार रंग लाया। — राजनीति | The Inside Journal

नई दिल्ली: देश की राजनीति में शनिवार को उस समय बड़ा भूचाल आ गया, जब केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। परीक्षा पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में लगातार सामने आ रही अनियमितताओं को लेकर पिछले कई हफ्तों से देशभर के छात्र आंदोलित थे, और आखिरकार उसी दबाव के आगे सरकार को झुकना पड़ा। रिपोर्ट्स के मुताबिक 25 जुलाई 2026 को धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा भेजा, जिसे स्वीकार कर लिया गया।

'देश के युवाओं की भावनाओं का सम्मान' अपने इस्तीफे में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि वह देश के युवाओं की आकांक्षाओं, भावनाओं और वैध अपेक्षाओं का गहरा सम्मान करते हैं। उनका यह बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि सरकार ने छात्रों के आक्रोश और उनकी मांगों की गंभीरता को स्वीकार किया है। लंबे समय से परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर जिस तरह छात्रों में निराशा और गुस्सा पनप रहा था, उसे देखते हुए यह इस्तीफा एक बड़े राजनीतिक और नैतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

37 दिन का ऐतिहासिक आंदोलन यह इस्तीफा किसी एक दिन की घटना का नतीजा नहीं है, बल्कि हफ्तों तक चले लगातार आंदोलन की परिणति है। रिपोर्ट्स के अनुसार युवाओं के नेतृत्व वाले एक संगठन के समर्थक दिल्ली के जंतर-मंतर पर पूरे 37 दिनों तक लगातार धरने पर बैठे रहे। छात्रों की सबसे बड़ी मांग यही थी कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाई जाए और गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई हो। शिक्षा मंत्री का इस्तीफा इस आंदोलन की केंद्रीय मांगों में से एक था।

दिन-रात चले इस प्रदर्शन में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए हजारों छात्र शामिल हुए। किताबें हाथ में लिए, नारे लगाते और अपनी मांगों के समर्थन में डटे इन युवाओं ने एक बार फिर साबित किया कि जब बात उनके भविष्य की हो, तो वे किसी भी हद तक जाकर आवाज़ उठा सकते हैं।

पेपर लीक की बढ़ती घटनाएं पिछले कुछ समय से देश में प्रतियोगी और प्रवेश परीक्षाओं के पेपर लीक होने की घटनाओं ने पूरी परीक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए थे। लाखों छात्र सालभर कड़ी मेहनत करते हैं, अपने और परिवार के सपनों को पूरा करने के लिए दिन-रात एक कर देते हैं, लेकिन पेपर लीक जैसी घटनाएं उनकी मेहनत पर पानी फेर देती हैं। ऐसी हर घटना न सिर्फ छात्रों का भरोसा तोड़ती है, बल्कि पूरी शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता को भी कठघरे में खड़ा कर देती है।

छात्रों का कहना था कि बार-बार पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी की घटनाओं के बावजूद व्यवस्था में कोई ठोस सुधार नहीं हो रहा था, जिससे उनका आक्रोश लगातार बढ़ता गया। यही आक्रोश आखिरकार एक बड़े जनांदोलन में तब्दील हो गया।

राजनीतिक हलचल तेज़ शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज़ हो गई है। विपक्षी दल इसे सरकार की नाकामी के तौर पर पेश कर रहे हैं, वहीं सत्ता पक्ष इसे युवाओं की भावनाओं के प्रति संवेदनशीलता के तौर पर बता रहा है। जानकार मानते हैं कि यह घटनाक्रम आने वाले दिनों में शिक्षा नीति और परीक्षा सुधारों को लेकर बड़ी बहस को जन्म दे सकता है।

धर्मेंद्र प्रधान का सफर धर्मेंद्र प्रधान लंबे समय से केंद्रीय राजनीति में सक्रिय रहे हैं और शिक्षा मंत्रालय संभालने से पहले भी वह कई अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी निभा चुके हैं। शिक्षा मंत्री के तौर पर उनके कार्यकाल में कई नीतिगत फैसले लिए गए, लेकिन परीक्षा में गड़बड़ी की घटनाओं ने उनके कार्यकाल पर गहरा असर डाला। उनका इस्तीफा उनके राजनीतिक जीवन का एक अहम मोड़ माना जा रहा है।

आगे की राह शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के साथ ही अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि परीक्षा प्रणाली में विश्वास कैसे बहाल किया जाएगा। छात्र चाहते हैं कि सिर्फ इस्तीफे से बात न रुके, बल्कि परीक्षा व्यवस्था में ठोस और स्थायी सुधार किए जाएं ताकि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाएं दोबारा न हों। यह देखना दिलचस्प होगा कि नई व्यवस्था इस दिशा में क्या कदम उठाती है।

यह पूरा घटनाक्रम एक बार फिर यह याद दिलाता है कि लोकतंत्र में जनता, और खासकर युवाओं की आवाज़ कितनी ताकतवर होती है। जब लाखों छात्र एकजुट होकर अपने हक के लिए खड़े होते हैं, तो बड़े से बड़ा फैसला बदल सकता है। द इनसाइड जर्नल की टीम इस अहम राजनीतिक घटनाक्रम पर पैनी नज़र बनाए हुए है और हर नई अपडेट आप तक सबसे पहले पहुंचाती रहेगी।

Anchor Khushbu
Anchor Khushbu
वरिष्ठ संवाददाता · The Inside Journal
खुशबू राजनीति, समाज और करेंट अफेयर्स पर पैनी नज़र रखती हैं। सच को सामने लाने और असरदार ख़बरें पाठकों तक पहुँचाने के प्रति समर्पित।
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