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23 जुलाई 2026 · नई दिल्लीई-पेपरलॉगिन
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मॉनसून में डेंगू-मलेरिया का प्रकोप: मुंबई-दिल्ली में तेज़ी से बढ़े मामले

बारिश के साथ मच्छर जनित बीमारियों की लहर, स्वाइन फ्लू के मामले भी तीन गुना बढ़े

मॉनसून में डेंगू-मलेरिया का प्रकोप: मुंबई-दिल्ली में तेज़ी से बढ़े मामले

मुंबई: मॉनसून के इस मौसम में देश के कई हिस्सों में मच्छर जनित बीमारियों का प्रकोप तेज़ी से बढ़ रहा है और स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ती जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अकेले मुंबई में जनवरी से जुलाई के बीच की तुलना करें तो मलेरिया के मामले 3,115 से बढ़कर 3,681 तक पहुँच गए हैं, जबकि डेंगू का आंकड़ा 734 से बढ़कर 938 हो चुका है। इसके साथ ही लेप्टोस्पायरोसिस के मामलों में भी उछाल दर्ज किया गया है। यह आंकड़े इस बात का साफ संकेत हैं कि इस बार बरसात अपने साथ बीमारियों की एक बड़ी लहर लेकर आई है। राजधानी दिल्ली की स्थिति भी कम चिंताजनक नहीं है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि मॉनसून के पीक पर पहुँचने से पहले ही दिल्ली में डेंगू के 171 मामले दर्ज हो चुके हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि जुलाई से लेकर अक्टूबर तक का समय मच्छर जनित बीमारियों के लिहाज़ से सबसे संवेदनशील रहता है, क्योंकि इस दौरान जगह-जगह जमा पानी मच्छरों के पनपने के लिए आदर्श परिस्थिति बना देता है। इस पूरे परिदृश्य में एक और खतरनाक पहलू यह है कि स्वाइन फ्लू के मामले भी तेज़ी से बढ़े हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस मौसमी अवधि में स्वाइन फ्लू के संक्रमण लगभग तीन गुना बढ़कर कुल 113 तक पहुँच गए हैं। यानी इस बार लोगों को एक साथ कई मोर्चों पर सतर्क रहने की ज़रूरत है। डेंगू क्यों बन रहा है सबसे बड़ा खतरा डेंगू एडीज़ मच्छर के काटने से फैलने वाली बीमारी है और यह मच्छर आमतौर पर साफ, रुके हुए पानी में पनपता है। यही वजह है कि घरों की छतों पर रखे बर्तन, कूलर, गमलों की ट्रे, पुराने टायर और निर्माण स्थलों पर जमा पानी डेंगू के मच्छरों के लिए सबसे बड़ा प्रजनन केंद्र बन जाते हैं। एडीज़ मच्छर की खास बात यह है कि यह दिन के समय, खासकर सुबह और शाम को ज़्यादा सक्रिय रहता है, इसलिए केवल रात में मच्छरदानी का इस्तेमाल पर्याप्त सुरक्षा नहीं देता। डेंगू के सामान्य लक्षणों में तेज़ बुखार, सिरदर्द, आँखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में तेज़ दर्द, जी मिचलाना और शरीर पर लाल चकत्ते शामिल हैं। कई बार इसे 'हड्डी तोड़ बुखार' भी कहा जाता है क्योंकि इसमें शरीर में असहनीय दर्द होता है। डॉक्टरों का कहना है कि अगर बुखार के साथ प्लेटलेट्स तेज़ी से गिर रही हों, मसूड़ों या नाक से खून आ रहा हो, या लगातार उल्टी हो रही हो, तो यह गंभीर डेंगू का संकेत हो सकता है और तुरंत अस्पताल जाना चाहिए। मलेरिया और लेप्टोस्पायरोसिस का बढ़ता दायरा मलेरिया एनोफिलीज़ मच्छर के काटने से फैलता है और इसकी पहचान ठंड लगकर आने वाले तेज़ बुखार, पसीना और कमज़ोरी से होती है। मॉनसून में जगह-जगह जमा गंदा पानी मलेरिया के मच्छरों को भी पनपने का मौका देता है। समय पर जाँच और इलाज से मलेरिया पूरी तरह ठीक हो जाता है, लेकिन लापरवाही बरतने पर यह जानलेवा भी बन सकता है। लेप्टोस्पायरोसिस एक ऐसी बीमारी है जो अक्सर बाढ़ और जलभराव वाले इलाकों में फैलती है। यह संक्रमित जानवरों के मूत्र से दूषित पानी के संपर्क में आने से होती है। जिन लोगों को बरसात के गंदे पानी में चलना पड़ता है, उनके लिए यह खतरा सबसे ज़्यादा होता है। इसके लक्षणों में तेज़ बुखार, मांसपेशियों में दर्द, आँखों का लाल होना और कभी-कभी पीलिया शामिल है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बरसात के पानी में उतरने से बचें और अगर मजबूरी हो तो गमबूट पहनें व बाद में पैरों को अच्छी तरह साफ करें। चिकनगुनिया और स्वाइन फ्लू की दोहरी मार मच्छर जनित बीमारियों की सूची में चिकनगुनिया भी शामिल है, जो इसी मौसम में लौटकर आता है। इसमें तेज़ बुखार के साथ जोड़ों में इतना दर्द होता है कि यह कई हफ्तों बल्कि कभी-कभी महीनों तक बना रहता है। हालाँकि यह आमतौर पर जानलेवा नहीं होता, लेकिन इसकी वजह से रोज़मर्रा का जीवन बुरी तरह प्रभावित हो जाता है। दूसरी ओर स्वाइन फ्लू यानी एच1एन1 एक वायरल संक्रमण है जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में हवा के ज़रिए फैलता है। इसके लक्षण सामान्य फ्लू जैसे ही होते हैं—बुखार, खाँसी, गले में खराश, बदन दर्द—लेकिन बुज़ुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए यह ज़्यादा खतरनाक साबित हो सकता है। भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क पहनना और बार-बार हाथ धोना इससे बचाव के सबसे कारगर उपाय हैं। प्रशासन ने कसी कमर बढ़ते मामलों को देखते हुए स्थानीय निकायों ने रोकथाम के प्रयास तेज़ कर दिए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार बीएमसी ने अब तक 3,000 से अधिक निर्माण स्थलों का निरीक्षण किया है, क्योंकि यहीं पर सबसे ज़्यादा पानी जमा होकर मच्छरों का प्रजनन केंद्र बनता है। इसके अलावा करीब आठ लाख घरों में फॉगिंग और मच्छर नियंत्रण की कार्रवाई की गई है। स्वास्थ्य विभाग लगातार लोगों से अपील कर रहा है कि वे अपने घरों और आसपास पानी जमा न होने दें, हफ्ते में एक दिन 'ड्राई डे' के रूप में मनाएँ जिसमें सभी बर्तनों को खाली कर साफ किया जाए, और बुखार आने पर खुद दवा लेने के बजाय डॉक्टर से संपर्क करें। विशेषज्ञ बार-बार यह चेतावनी दे रहे हैं कि खुद से एंटीबायोटिक या दर्द निवारक दवाएँ लेना, खासकर डेंगू के मामले में, खतरनाक हो सकता है क्योंकि कुछ दवाएँ प्लेटलेट्स को और तेज़ी से गिरा सकती हैं। बचाव के व्यावहारिक उपाय मच्छर जनित बीमारियों से बचने का सबसे कारगर तरीका है मच्छरों को पनपने से रोकना और उनके काटने से बचना। इसके लिए घर के अंदर और बाहर कहीं भी पानी जमा न होने दें। कूलर, गमले, फ्रिज की ट्रे और छत पर पड़े पुराने सामान की नियमित सफाई करें। सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल करें और दिन में भी शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें। खिड़कियों और दरवाज़ों पर जाली लगवाना भी बेहद कारगर उपाय है। खानपान के मामले में इस मौसम में सावधानी और ज़रूरी हो जाती है। साफ और उबला हुआ पानी पिएँ, बाहर के कटे फल और खुले में बिकने वाले खाने से बचें, और ताज़ा व गर्म भोजन को प्राथमिकता दें। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए मौसमी फल, हरी सब्ज़ियाँ और पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लें। बुखार की स्थिति में शरीर में पानी की कमी न होने दें, क्योंकि डेंगू और अन्य वायरल बुखार में डिहाइड्रेशन स्थिति को और बिगाड़ सकता है। कब जाएँ डॉक्टर के पास कोई भी बुखार अगर दो दिन से ज़्यादा बना रहे, तेज़ी से बढ़े या साथ में असामान्य लक्षण दिखें तो तुरंत जाँच करानी चाहिए। खासकर बच्चों, बुज़ुर्गों और गर्भवती महिलाओं के मामले में देरी नहीं करनी चाहिए। अगर बुखार के साथ सांस लेने में तकलीफ, लगातार उल्टी, पेट में तेज़ दर्द, शरीर पर चकत्ते, या किसी भी तरह का रक्तस्राव दिखे तो इसे आपात स्थिति समझकर अस्पताल पहुँचना चाहिए। समय पर की गई खून की जाँच से डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रमणों की सही पहचान हो जाती है, जिससे इलाज आसान हो जाता है। डॉक्टर की सलाह के बिना प्लेटलेट्स को लेकर घबराना या अनावश्यक रूप से प्लेटलेट चढ़वाने की माँग करना उचित नहीं है; अधिकतर मामलों में शरीर खुद ही ठीक हो जाता है, बशर्ते मरीज़ को पर्याप्त आराम, तरल पदार्थ और चिकित्सकीय निगरानी मिले। घर और सोसाइटी की ज़िम्मेदारी मच्छर जनित बीमारियों से लड़ाई केवल व्यक्तिगत स्तर पर संभव नहीं है, इसके लिए सामूहिक प्रयास ज़रूरी है। हाउसिंग सोसाइटियों को चाहिए कि वे परिसर में जलभराव न होने दें, नियमित फॉगिंग कराएँ, ओवरहेड टैंक और पानी की टंकियों को ढककर रखें, और कचरे का सही निपटान सुनिश्चित करें। स्कूलों और दफ्तरों में भी जागरूकता फैलाना और साफ-सफाई बनाए रखना उतना ही ज़रूरी है। लोगों को यह भी समझना होगा कि रोकथाम इलाज से हमेशा बेहतर है। कुछ मिनटों की सतर्कता—एक बर्तन का पानी पलट देना, एक कूलर साफ कर देना—पूरे परिवार को एक गंभीर बीमारी से बचा सकती है। बच्चों और बुज़ुर्गों की विशेष देखभाल घर के सबसे कमज़ोर सदस्य—बच्चे और बुज़ुर्ग—इस मौसम में संक्रमण के प्रति सबसे ज़्यादा संवेदनशील होते हैं। बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता अभी पूरी तरह विकसित नहीं होती, जबकि बुज़ुर्गों में उम्र और पहले से मौजूद बीमारियों के कारण संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है। इसलिए इन दोनों वर्गों पर विशेष नज़र रखना ज़रूरी है। बच्चों को स्कूल भेजते समय उन्हें पूरी बाँह के कपड़े पहनाएँ और मच्छर भगाने वाली क्रीम का इस्तेमाल करें। खेलने के बाद हाथ-पैर धुलवाने की आदत डालें। बुज़ुर्गों के मामले में किसी भी बुखार या कमज़ोरी को हल्के में न लें और नियमित रूप से उनका तापमान व स्वास्थ्य जाँचते रहें। पर्याप्त नींद, संतुलित आहार और तरल पदार्थ इन दोनों के लिए सबसे बड़ी सुरक्षा कवच हैं। अफवाहों से बचें, तथ्यों पर भरोसा करें बीमारियों के इस मौसम में सोशल मीडिया पर तरह-तरह के घरेलू नुस्खे और दावे तेज़ी से वायरल होते हैं। कुछ लोग बिना किसी वैज्ञानिक आधार के प्लेटलेट्स बढ़ाने के चमत्कारी उपाय बताने लगते हैं। विशेषज्ञ आगाह करते हैं कि ऐसे अपुष्ट दावों पर आँख मूँदकर भरोसा करना खतरनाक हो सकता है। पपीते के पत्ते जैसे कुछ उपायों को लेकर भले ही लोकप्रिय धारणाएँ हों, लेकिन इलाज हमेशा डॉक्टर की देखरेख में ही होना चाहिए। सही जानकारी और समय पर चिकित्सकीय सलाह ही किसी भी बीमारी से लड़ने का सबसे कारगर हथियार है। सरकारी स्वास्थ्य विभाग और मान्यता प्राप्त अस्पतालों की गाइडलाइनों का पालन करें और किसी भी संदेह की स्थिति में योग्य चिकित्सक से ही संपर्क करें। स्वस्थ रहने के लिए जागरूकता के साथ-साथ धैर्य और सही निर्णय भी उतने ही ज़रूरी हैं। आगे क्या विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे बारिश जारी रहेगी, आने वाले हफ्तों में मामलों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। ऐसे में सबसे बड़ा हथियार है जागरूकता और सतर्कता। स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइनों का पालन करना, समय पर जाँच कराना और अफवाहों के बजाय आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करना इस मौसम में सुरक्षित रहने की कुंजी है। द इनसाइड जर्नल अपने पाठकों से अपील करता है कि वे खुद भी सतर्क रहें और अपने आसपास के लोगों को भी जागरूक करें, ताकि यह मॉनसून बीमारी नहीं, बल्कि सेहत और सुरक्षा का मौसम बने।

Vikram Rao
Journalist · The Inside Journal
सच्चाई सामने लाने और पाठकों तक असरदार ख़बरें पहुँचाने के प्रति समर्पित।
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