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27 जुलाई 2026 · नई दिल्लीई-पेपरलॉगिन
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पेपर लीक पर सख़्ती की तैयारी: सरकार आज संसद में पेश करेगी पब्लिक एग्ज़ामिनेशन संशोधन विधेयक, नकल माफिया पर कसेगा शिकंजा

केंद्रीय कैबिनेट की मंज़ूरी के बाद परीक्षाओं में पेपर लीक और नकल रोकने से जुड़े संशोधन विधेयक को मानसून सत्र में पेश करने की तैयारी है। इसका मक़सद परीक्षा प्रणाली की साख बहाल करना है।

पेपर लीक पर सख़्ती की तैयारी: सरकार आज संसद में पेश करेगी पब्लिक एग्ज़ामिनेशन संशोधन विधेयक, नकल माफिया पर कसेगा शिकंजा
केंद्रीय कैबिनेट की मंज़ूरी के बाद परीक्षाओं में पेपर लीक और नकल रोकने से जुड़े संशोधन विधेयक को मानसून सत्र में पेश करने की तैयारी है। इसका मक़सद परीक्षा प्रणाली की साख बहाल करना है। — शिक्षा | The Inside Journal

परीक्षाओं में पेपर लीक और संगठित नकल की बढ़ती घटनाओं पर लगाम कसने के लिए केंद्र सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। सूचना के अनुसार, सार्वजनिक परीक्षाओं (पब्लिक एग्ज़ामिनेशन) से जुड़े संशोधन विधेयक को संसद के मानसून सत्र में पेश किए जाने की तैयारी है। केंद्रीय मंत्रिमंडल पहले ही इस विधेयक से जुड़े प्रस्ताव को मंज़ूरी दे चुका है।

क्यों पड़ी सख़्त कानून की ज़रूरत पिछले कुछ वर्षों में देश की कई बड़ी प्रतियोगी और भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाएँ सामने आईं, जिससे लाखों मेहनती छात्रों का भविष्य दांव पर लग गया। इन घटनाओं के बाद देश भर में छात्रों और अभिभावकों ने कड़ा विरोध जताया और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल उठे। इसी पृष्ठभूमि में सरकार परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने के लिए कानूनी ढाँचे को और मज़बूत करना चाहती है।

विधेयक का मक़सद सार्वजनिक परीक्षाओं से जुड़े कानून का मुख्य उद्देश्य परीक्षाओं में होने वाली अनुचित गतिविधियों — जैसे प्रश्नपत्र लीक करना, उत्तर पहले से उपलब्ध कराना, नकल गिरोहों का संचालन और परीक्षा केंद्रों में गड़बड़ी — पर रोक लगाना है। ऐसे अपराधों में शामिल लोगों और संगठित गिरोहों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई का प्रावधान इस कानूनी ढाँचे का अहम हिस्सा माना जा रहा है।

छात्रों को राहत की उम्मीद इस कदम से देश के करोड़ों छात्रों को यह भरोसा मिलने की उम्मीद है कि उनकी मेहनत बेकार नहीं जाएगी और परीक्षाएँ निष्पक्ष तरीके से होंगी। जानकारों का मानना है कि सख़्त कानून के साथ-साथ परीक्षा आयोजन की तकनीकी व्यवस्था को मज़बूत करना भी ज़रूरी है, ताकि गड़बड़ी की गुंजाइश ही न बचे।

मानसून सत्र में अहम विधायी कामकाज संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हुआ है और अगस्त तक चलने की उम्मीद है। इस सत्र में सरकार कई अहम विधेयकों को पारित कराना चाहती है, वहीं विपक्ष भी विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है। परीक्षा सुधार से जुड़ा यह विधेयक सत्र के प्रमुख विषयों में से एक बनकर उभरा है।

आगे क्या विधेयक के संसद में पेश होने के बाद उस पर चर्चा होगी और दोनों सदनों से पारित होने के बाद ही यह कानून का रूप लेगा। छात्र संगठन और शिक्षा जगत इस पूरे घटनाक्रम पर नज़र बनाए हुए हैं, क्योंकि इसका सीधा असर आने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं और लाखों परीक्षार्थियों पर पड़ेगा।

Anchor Khushbu
Anchor Khushbu
वरिष्ठ संवाददाता · The Inside Journal
खुशबू राजनीति, समाज और करेंट अफेयर्स पर पैनी नज़र रखती हैं। सच को सामने लाने और असरदार ख़बरें पाठकों तक पहुँचाने के प्रति समर्पित।
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