ब्रेकिंग
Border 2 आज सिनेमाघरों में रिलीज़ — सनी देओल, वरुण धवन, दिलजीत की बड़ी फिल्म IND vs ZIM: श्रेयस अय्यर की कप्तानी में पहला T20 आज हरारे में NEET पेपर लीक: संसद में आज भी हंगामे के आसार, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग सेंसेक्स 715 अंक लुढ़का, निफ्टी 24,000 के नीचे बंद — FII बिकवाली जारी असम में बाढ़ का कहर — एक दिन में 21 मौतें, मृतकों की संख्या 31 पहुँची Border 2 आज सिनेमाघरों में रिलीज़ — सनी देओल, वरुण धवन, दिलजीत की बड़ी फिल्म IND vs ZIM: श्रेयस अय्यर की कप्तानी में पहला T20 आज हरारे में NEET पेपर लीक: संसद में आज भी हंगामे के आसार, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग सेंसेक्स 715 अंक लुढ़का, निफ्टी 24,000 के नीचे बंद — FII बिकवाली जारी असम में बाढ़ का कहर — एक दिन में 21 मौतें, मृतकों की संख्या 31 पहुँची
23 जुलाई 2026 · नई दिल्लीई-पेपरलॉगिन
ख़बरें, विषय, लेखक, वीडियो खोजें…खोजें
भारतदुनियाराजनीतिकारोबारटेक्नोलॉजीखेलमनोरंजनलाइफस्टाइलसेहतशिक्षाऑटो
टेक्नोलॉजी

भारत की तीसरी सेमीकंडक्टर फैक्ट्री चालू: साणंद में CG Semi प्लांट का उद्घाटन

PM मोदी ने किया commercial operations का शुभारंभ, 30 करोड़ यूनिट/वर्ष की क्षमता

भारत की तीसरी सेमीकंडक्टर फैक्ट्री चालू: साणंद में CG Semi प्लांट का उद्घाटन

भारत की सेमीकंडक्टर यात्रा में एक और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के साणंद में CG Semi की OSAT यानी असेंबली और टेस्टिंग फैसिलिटी के कमर्शियल ऑपरेशंस का उद्घाटन किया, और इसी के साथ देश की तीसरी सेमीकंडक्टर फैक्ट्री ने व्यावसायिक उत्पादन की दुनिया में क़दम रख दिया। India Semiconductor Mission के तहत यह तीसरी ऐसी फैसिलिटी है जो अब चालू हालत में है, और जानकार इसे भारत के चिप सपने की सबसे ठोस उपलब्धियों में गिन रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, CG Semi की यह परियोजना CG Power और जापान की मशहूर चिप कंपनी Renesas समेत साझेदारों का जॉइंट वेंचर है। दो साइटों में फैली इस परियोजना में कुल ₹7,600 करोड़ का निवेश हो रहा है, और पूरी क्षमता पर पहुँचने के बाद यहाँ हर साल 30 करोड़ यूनिट तक चिप पैकेजिंग और टेस्टिंग की जा सकेगी। यह आँकड़ा बताता है कि साणंद अब सिर्फ़ ऑटोमोबाइल हब नहीं, बल्कि देश के इलेक्ट्रॉनिक्स मानचित्र का भी चमकता सितारा बनता जा रहा है।

यह ख़बर सिर्फ़ एक फैक्ट्री के उद्घाटन की नहीं है। यह उस बदलाव की कहानी है जिसमें भारत दुनिया की चिप सप्लाई चेन में दर्शक की भूमिका छोड़कर खिलाड़ी बनने की तैयारी कर रहा है। आइए समझते हैं कि यह फैसिलिटी क्या करेगी, इसके पीछे कौन-कौन हैं, और आम भारतीय के लिए इसके क्या मायने हैं।

साणंद बना सेमीकंडक्टर हलचल का केंद्र

गुजरात का साणंद कभी ऑटोमोबाइल प्लांट्स के लिए जाना जाता था, लेकिन बीते कुछ वर्षों में यह इलाक़ा देश की सेमीकंडक्टर महत्वाकांक्षा का केंद्र बन गया है। यहाँ एक से ज़्यादा चिप परियोजनाएँ आकार ले रही हैं, और CG Semi की फैसिलिटी का व्यावसायिक उत्पादन शुरू होना इस पूरे क्लस्टर के लिए बड़ा मनोवैज्ञानिक पड़ाव है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, साणंद को चुनने की बड़ी वजहें हैं — बंदरगाहों से अच्छी कनेक्टिविटी, भरोसेमंद बिजली-पानी की सप्लाई, राज्य सरकार की सक्रिय नीति और पहले से मौजूद औद्योगिक इकोसिस्टम। सेमीकंडक्टर फैक्ट्री के लिए स्थिर इंफ्रास्ट्रक्चर सबसे बुनियादी शर्त होती है, क्योंकि यहाँ उत्पादन में मामूली रुकावट भी करोड़ों का नुक़सान कर सकती है। यही वजह है कि कंपनियाँ ऐसी जगहों को प्राथमिकता देती हैं जहाँ जोखिम कम से कम हो।

CG Semi: कौन-कौन हैं इसके पीछे

CG Semi दरअसल एक जॉइंट वेंचर है, जिसमें भारत की जानी-मानी इंजीनियरिंग कंपनी CG Power प्रमुख साझेदार है। उसके साथ जापान की Renesas Electronics जैसी वैश्विक चिप कंपनी की साझेदारी इस परियोजना को ख़ास बनाती है, क्योंकि Renesas ऑटोमोटिव और इंडस्ट्रियल चिप्स की दुनिया का बड़ा नाम है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस गठजोड़ में तकनीकी विशेषज्ञता और वैश्विक ग्राहक नेटवर्क दोनों का लाभ भारत को मिलेगा।

ऐसे जॉइंट वेंचर का महत्व समझना ज़रूरी है। सेमीकंडक्टर पैकेजिंग और टेस्टिंग तकनीकी रूप से बेहद संवेदनशील काम है, जिसमें दशकों का अनुभव मायने रखता है। कोई भी देश यह क्षमता रातोंरात नहीं बना सकता। विदेशी साझेदार के साथ मिलकर काम करने से भारतीय इंजीनियरों को वह जानकारी और अनुशासन सीखने को मिलता है जो आगे चलकर देश की अपनी क्षमता बनती है। जापान, ताइवान और कोरिया — तीनों की चिप कहानियाँ इसी रास्ते से गुज़री हैं।

OSAT क्या है और क्यों अहम

आम पाठकों के मन में सवाल उठ सकता है कि OSAT आख़िर होता क्या है। दरअसल चिप बनाने की प्रक्रिया मोटे तौर पर दो हिस्सों में बँटी है। पहला हिस्सा है फैब्रिकेशन, जिसमें सिलिकॉन वेफ़र पर बेहद बारीक सर्किट उकेरे जाते हैं। दूसरा हिस्सा है असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग — यानी ATMP या OSAT — जिसमें उस वेफ़र को काटकर, जोड़कर, जाँचकर वह चिप बनाई जाती है जो असल में किसी फोन, कार या फ्रिज के अंदर लगती है।

OSAT को अक्सर कम आँका जाता है, लेकिन सच यह है कि बिना पैकेजिंग और टेस्टिंग के कोई चिप काम की नहीं होती। दुनिया भर में बनी चिप्स को पैकेजिंग के लिए गिनी-चुनी जगहों पर भेजा जाता है, और यही वह मौक़ा है जिसे भारत पकड़ना चाहता है। फैब लगाने के मुक़ाबले OSAT फैसिलिटी कम पूँजी और कम समय में खड़ी हो जाती है, इसलिए यह सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम में दाख़िल होने का व्यावहारिक दरवाज़ा मानी जाती है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, CG Semi की फैसिलिटी में ऐसे चिप पैकेज तैयार होंगे जिनका इस्तेमाल ऑटोमोबाइल, कंज़्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और औद्योगिक उपकरणों में होता है। यानी आने वाले समय में आपकी कार या घरेलू उपकरण के अंदर लगी चिप पर परोक्ष रूप से साणंद की छाप हो सकती है।

30 करोड़ यूनिट सालाना क्षमता का मतलब

इस फैसिलिटी की पीक क्षमता 30 करोड़ यूनिट प्रति वर्ष बताई गई है। यह संख्या सुनने में जितनी बड़ी लगती है, इसका रणनीतिक मतलब उससे भी बड़ा है। इसका अर्थ है कि भारत में अब इतने बड़े पैमाने पर चिप्स की पैकेजिंग-टेस्टिंग हो सकेगी कि घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री की ज़रूरतों का एक हिस्सा देश के भीतर ही पूरा किया जा सके।

दो साइटों में कुल ₹7,600 करोड़ का निवेश भी इस भरोसे का संकेत है कि कंपनियाँ भारत के सेमीकंडक्टर भविष्य पर लंबा दाँव लगा रही हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, परियोजना चरणबद्ध तरीक़े से आगे बढ़ेगी — पहले शुरुआती उत्पादन, फिर धीरे-धीरे क्षमता विस्तार। यह तरीक़ा दुनिया भर में आज़माया हुआ है, क्योंकि चिप उत्पादन में गुणवत्ता स्थिर करने के बाद ही पैमाना बढ़ाना समझदारी होती है।

India Semiconductor Mission की तीसरी कामयाबी

यह फैसिलिटी India Semiconductor Mission यानी ISM के तहत चालू होने वाली तीसरी इकाई है। कुछ साल पहले जब सरकार ने सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग के लिए बड़े प्रोत्साहन पैकेज का एलान किया था, तब कई जानकारों ने इसे बेहद मुश्किल लक्ष्य बताया था। चिप इंडस्ट्री में दशकों की लीड रखने वाले देशों के सामने नए खिलाड़ी का टिकना आसान नहीं होता। लेकिन एक के बाद एक परियोजनाओं का ज़मीन पर उतरना बताता है कि नीति और निजी निवेश का तालमेल नतीजे देने लगा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ISM के तहत देश के अलग-अलग हिस्सों में फैब और OSAT परियोजनाएँ अलग-अलग चरणों में हैं — कुछ निर्माणाधीन हैं, कुछ ट्रायल उत्पादन में और अब तीन व्यावसायिक उत्पादन में। हर नई चालू फैसिलिटी अगली परियोजनाओं के लिए भरोसा बढ़ाती है, क्योंकि वैश्विक कंपनियाँ निवेश से पहले यही देखती हैं कि किसी देश में परियोजनाएँ काग़ज़ से कारख़ाने तक पहुँचती हैं या नहीं।

रोज़गार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को फ़ायदा

सेमीकंडक्टर फैक्ट्री का असर सिर्फ़ हाई-टेक इंजीनियरों तक सीमित नहीं रहता। ऐसी हर परियोजना अपने साथ प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोज़गार की लंबी शृंखला लाती है — ऑपरेटर, टेक्नीशियन, क्वालिटी इंजीनियर, सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स से जुड़े लोग, और परिसर के इर्द-गिर्द पनपने वाला सेवा क्षेत्र। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, साणंद क्लस्टर की परियोजनाओं से हज़ारों प्रत्यक्ष नौकरियाँ और उससे कई गुना अप्रत्यक्ष रोज़गार पैदा होने की उम्मीद है।

इससे भी अहम है कौशल का पहलू। चिप इंडस्ट्री में काम करने वाले हर इंजीनियर और टेक्नीशियन के साथ देश में वह विशेषज्ञता जमा होती है जो आगे नई कंपनियों, नए स्टार्टअप और नई परियोजनाओं की नींव बनती है। कई राज्यों के इंजीनियरिंग कॉलेज अब सेमीकंडक्टर से जुड़े कोर्स शुरू कर रहे हैं, और उद्योग-अकादमिक साझेदारी की पहलें भी तेज़ हुई हैं। यानी असर सिर्फ़ फैक्ट्री की चारदीवारी तक नहीं, क्लासरूम तक पहुँच रहा है।

ग्लोबल चिप सप्लाई चेन में भारत की जगह

कोविड के दौर की चिप किल्लत ने पूरी दुनिया को सिखाया कि सेमीकंडक्टर पर किसी एक क्षेत्र की अति-निर्भरता कितनी महँगी पड़ सकती है। कारों से लेकर गेमिंग कंसोल तक, हर चीज़ का उत्पादन ठप हुआ था। तभी से दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएँ चिप सप्लाई चेन में विविधता लाने में जुटी हैं, और भारत इस बदलाव को अपने लिए ऐतिहासिक अवसर के रूप में देख रहा है।

भारत के पास इस दौड़ में कुछ ख़ास ताक़तें हैं — दुनिया का बड़ा चिप डिज़ाइन टैलेंट पहले से यहाँ काम कर रहा है, घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स बाज़ार तेज़ी से बढ़ रहा है, और सरकार की नीति लगातार सहायक बनी हुई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वैश्विक कंपनियाँ अब भारत को सिर्फ़ बाज़ार नहीं, बल्कि सप्लाई चेन के भरोसेमंद ठिकाने के तौर पर देखने लगी हैं। साणंद जैसी फैसिलिटी इस भरोसे को ठोस ज़मीन देती हैं।

Make in India को नई रफ़्तार

यह उद्घाटन Make in India अभियान के नज़रिए से भी अहम है। मोबाइल फोन असेंबली में भारत की कामयाबी की कहानी दुनिया देख चुकी है — देश आज दुनिया के सबसे बड़े मोबाइल निर्माताओं में शुमार है। लेकिन असली मूल्य तब जुड़ता है जब फोन के भीतर लगने वाले कल-पुर्ज़े भी देश में बनें। चिप पैकेजिंग इसी दिशा में बड़ा क़दम है, क्योंकि यह इलेक्ट्रॉनिक्स की मूल्य शृंखला के सबसे क़ीमती हिस्से में देश की हिस्सेदारी बढ़ाती है।

जानकारों का मानना है कि जैसे-जैसे भारत में पैकेजिंग-टेस्टिंग की क्षमता बढ़ेगी, वैसे-वैसे कंपोनेंट इकोसिस्टम — सब्सट्रेट, केमिकल, गैसें, उपकरण — के स्थानीयकरण का दबाव और अवसर दोनों बढ़ेंगे। यही वह चक्र है जिससे कोई देश असेंबली हब से आगे बढ़कर मैन्युफैक्चरिंग पावरहाउस बनता है।

आगे क्या

अब निगाहें इस बात पर होंगी कि CG Semi की फैसिलिटी कितनी तेज़ी से अपनी पूरी क्षमता की ओर बढ़ती है और उसके बनाए पैकेज वैश्विक ग्राहकों की गुणवत्ता कसौटी पर कैसे खरे उतरते हैं। साथ ही देश की बाक़ी सेमीकंडक्टर परियोजनाओं — फैब से लेकर अन्य OSAT इकाइयों तक — की प्रगति पर भी नज़र रहेगी, क्योंकि असली लक्ष्य किसी एक फैक्ट्री का चलना नहीं, बल्कि पूरे इकोसिस्टम का खड़ा होना है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आने वाले वर्षों में भारत में सेमीकंडक्टर से जुड़े और बड़े एलान होने की संभावना है, जिनमें नई साझेदारियाँ और नई साइटें शामिल हो सकती हैं। साणंद की यह फैक्ट्री उस लंबे सफ़र का तीसरा मील का पत्थर है, और इसका सबसे बड़ा संदेश यही है कि भारत का चिप मिशन अब घोषणाओं से निकलकर उत्पादन के दौर में दाख़िल हो चुका है। जिस देश ने सॉफ़्टवेयर में दुनिया को अपनी क़ाबिलियत दिखाई, वह अब सिलिकॉन में भी अपनी जगह बनाने निकला है — और साणंद इस कहानी का नया पता है।

Rohit Sharma
Journalist · The Inside Journal
सच्चाई सामने लाने और पाठकों तक असरदार ख़बरें पहुँचाने के प्रति समर्पित।
प्रोफ़ाइल देखें
संबंधित ख़बरें