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26 जुलाई 2026 · नई दिल्लीई-पेपरलॉगिन
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असम बाढ़ का कहर: मृतकों की संख्या 66 पहुंची, 6.5 लाख से ज़्यादा लोग प्रभावित; शिवसागर सबसे बुरी तरह त्रस्त

असम में इस साल की बाढ़ ने भीषण रूप ले लिया है। छह ज़िलों में साढ़े छह लाख से अधिक लोग प्रभावित हैं और अब तक 66 लोगों की जान जा चुकी है, हालांकि रविवार को कई इलाकों में पानी उतरने से थोड़ी राहत मिली।

असम बाढ़ का कहर: मृतकों की संख्या 66 पहुंची, 6.5 लाख से ज़्यादा लोग प्रभावित; शिवसागर सबसे बुरी तरह त्रस्त
असम में इस साल की बाढ़ ने भीषण रूप ले लिया है। छह ज़िलों में साढ़े छह लाख से अधिक लोग प्रभावित हैं और अब तक 66 लोगों की जान जा चुकी है, हालांकि रविवार को कई इलाकों में पानी उतरने से थोड़ी राहत मिली। — भारत | The Inside Journal

गुवाहाटी: असम में इस वर्ष की बाढ़ ने विनाशकारी रूप धारण कर लिया है। ताज़ा जानकारी के अनुसार राज्य में बाढ़ से मरने वालों की कुल संख्या बढ़कर 66 हो गई है, जबकि छह ज़िलों में साढ़े छह लाख से अधिक लोग इस प्राकृतिक आपदा की चपेट में हैं। हालांकि रविवार, 26 जुलाई को कई प्रभावित इलाकों में पानी उतरने से हालात में मामूली सुधार देखने को मिला, खासकर उन क्षेत्रों में जहां रातभर बारिश नहीं हुई। इसके बावजूद लाखों लोगों के लिए यह त्रासदी अब भी दुःस्वप्न बनी हुई है।

छह ज़िलों में तबाही अधिकारियों के मुताबिक चराइदेव, डिब्रूगढ़, गोलाघाट, जोरहाट, नगांव और शिवसागर—इन छह ज़िलों में कुल मिलाकर 6,54,800 से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। इनमें शिवसागर ज़िला सबसे बुरी तरह प्रभावित है, जहां अकेले करीब 3.48 लाख लोग बाढ़ की मार झेल रहे हैं। इसके बाद चराइदेव और जोरहाट सबसे अधिक प्रभावित ज़िलों में शामिल हैं। गांव के गांव जलमग्न हो गए हैं, खेतों में खड़ी फसलें बर्बाद हो चुकी हैं और लोगों को अपना घर-बार छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करना पड़ा है।

राहत और बचाव कार्य युद्ध स्तर पर राज्य प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए बड़े पैमाने पर राहत अभियान चलाया है। रिपोर्ट्स के अनुसार अब तक 274 राहत सुविधाएं स्थापित की गई हैं, जिनमें 90 राहत शिविर और 184 वितरण केंद्र शामिल हैं। इन शिविरों में फिलहाल 18,902 लोग शरण लिए हुए हैं, जिनमें 2,157 बच्चे और 187 गर्भवती या स्तनपान कराने वाली माताएं शामिल हैं। प्रशासन इन शिविरों में भोजन, पेयजल, दवाइयां और अन्य ज़रूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की कोशिश कर रहा है, लेकिन प्रभावितों की बड़ी संख्या को देखते हुए चुनौतियां भी कम नहीं हैं।

अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रहीं नदियां भले ही ऊपरी असम के अधिकांश इलाकों—खासकर चराइदेव, शिवसागर और जोरहाट—में जलस्तर कम होने लगा है, लेकिन कई नदियां अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। शिवसागर में दिखौ नदी और नुमालीगढ़ में धनसिरी (दक्षिण) नदी का जलस्तर अभी भी खतरनाक स्तर पर बना हुआ है। इसका मतलब है कि खतरा पूरी तरह टला नहीं है और प्रशासन को लगातार सतर्क रहना पड़ रहा है। मौसम विभाग की चेतावनियों को देखते हुए किसी भी नई बारिश से स्थिति दोबारा बिगड़ सकती है।

बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान बाढ़ ने राज्य के बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। रिपोर्ट्स के अनुसार अब तक 143 सड़कें क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं, जिनमें से अधिकांश शिवसागर, जोरहाट और चराइदेव ज़िलों में हैं। इसके अलावा 10 तटबंध प्रभावित हुए हैं, जिनमें अकेले शिवसागर ज़िले में सात जगह तटबंध टूटने की घटनाएं दर्ज की गई हैं। तटबंधों के टूटने से नया इलाका जलमग्न होने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे राहत कार्यों में और कठिनाई आती है।

हर साल की त्रासदी असम के लिए मॉनसून के दौरान बाढ़ कोई नई बात नहीं है। ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों में हर साल आने वाला उफान लाखों लोगों की ज़िंदगी को अस्त-व्यस्त कर देता है। जान-माल के नुकसान के साथ-साथ खेती, पशुधन और आजीविका पर भी इसका गहरा असर पड़ता है। विशेषज्ञ लंबे समय से बाढ़ प्रबंधन के स्थायी समाधान, बेहतर तटबंधों और नदी-प्रबंधन की ज़रूरत पर जोर देते रहे हैं, ताकि हर साल की इस तबाही को कम किया जा सके।

आगे की राह फिलहाल प्रशासन का पूरा ध्यान राहत और बचाव कार्यों पर केंद्रित है। जलस्तर कम होने के साथ ही अब पुनर्वास और नुकसान के आकलन की चुनौती सामने खड़ी है। बाढ़ का पानी उतरने के बाद बीमारियों के फैलने का खतरा भी बढ़ जाता है, जिससे निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग को सतर्क रहना होगा। द इनसाइड जर्नल की टीम असम की इस त्रासदी पर लगातार नज़र बनाए हुए है और राहत कार्यों की हर ताज़ा जानकारी आप तक पहुंचाती रहेगी। हमारी संवेदनाएं उन सभी परिवारों के साथ हैं जिन्होंने इस आपदा में अपनों को खोया है।

Anchor Khushbu
Anchor Khushbu
वरिष्ठ संवाददाता · The Inside Journal
खुशबू राजनीति, समाज और करेंट अफेयर्स पर पैनी नज़र रखती हैं। सच को सामने लाने और असरदार ख़बरें पाठकों तक पहुँचाने के प्रति समर्पित।
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