ग्राउंड रिपोर्ट: NEET पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर CJP का प्रदर्शन उग्र, पुलिस से झड़प में कई घायल
छात्र न्याय आंदोलन की आंच पटना तक पहुंची, जनता भेज रही खाना-पानी; राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार के सामने रखीं तीन मांगें, सोनम वांगचुक का समर्थन

नई दिल्ली: NEET पेपर लीक के खिलाफ चल रहा छात्र न्याय आंदोलन यानी CJP गुरुवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर अपने सबसे तीखे तेवर में नजर आया। सुबह से ही हजारों छात्र हाथों में तख्तियां और बैनर लिए जुटने लगे थे और दोपहर होते-होते पूरा इलाका नारों से गूंज उठा। माहौल उस वक्त तनावपूर्ण हो गया, जब प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की शुरू हुई। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस झड़प में कई प्रदर्शनकारी घायल हुए हैं, जिनमें से कुछ को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। जंतर-मंतर पर मौजूद छात्रों का कहना है कि वे अपनी मेहनत के साथ हुए धोखे का हिसाब मांगने आए हैं। एक तरफ बैरिकेड्स के पीछे भारी पुलिस बल तैनात है, तो दूसरी तरफ छात्रों का हुजूम है, जो न्याय की मांग पर अड़ा है। आंदोलन अब सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं रहा। पटना समेत कई शहरों में छात्र सड़कों पर उतर आए हैं और यह आंदोलन धीरे-धीरे देशव्यापी रूप लेता जा रहा है। इस बीच आंदोलन को राजनीतिक और सामाजिक समर्थन भी लगातार बढ़ रहा है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार के सामने तीन मांगें रखीं, वहीं जाने-माने पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी आंदोलन का समर्थन किया है। आम जनता का जुड़ाव इस कदर है कि लोग प्रदर्शनकारी छात्रों के लिए खाना, पानी और जरूरी सामान लेकर जंतर-मंतर पहुंच रहे हैं। जंतर-मंतर पर दिनभर तनाव का माहौल जंतर-मंतर की सुबह आम दिनों से बिल्कुल अलग थी। मेट्रो स्टेशनों से निकलकर छात्रों की टोलियां लगातार प्रदर्शन स्थल की ओर बढ़ रही थीं। किसी के हाथ में तिरंगा था, तो किसी के हाथ में न्याय मांगती तख्ती। छात्रों ने अपने भविष्य से जुड़े सवालों को नारों की शक्ल दे दी थी। दोपहर तक भीड़ इतनी बढ़ गई कि आसपास की सड़कों पर आवाजाही प्रभावित होने लगी। प्रदर्शन स्थल पर मंच से छात्र नेता एक-एक कर अपनी बात रख रहे थे। कोई अपनी सालों की तैयारी का दर्द बयां कर रहा था, तो कोई व्यवस्था से सवाल पूछ रहा था। ग्राउंड पर मौजूद कई छात्रों ने बताया कि वे छोटे शहरों और गांवों से आए हैं, जहां उनके माता-पिता ने खेत गिरवी रखकर या कर्ज लेकर उन्हें कोचिंग करवाई है। ऐसे में पेपर लीक की खबरें उनके लिए सिर्फ एक घोटाला नहीं, बल्कि उनके पूरे परिवार के सपनों पर चोट हैं। दिन चढ़ने के साथ माहौल गर्म होता गया। छात्रों का एक समूह आगे बढ़ने की कोशिश करने लगा, जिसे पुलिस ने बैरिकेड्स लगाकर रोका। इसी दौरान तनाव बढ़ा और स्थिति बिगड़ती चली गई। पुलिस से झड़प में कई घायल मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बैरिकेड्स पर हुई धक्का-मुक्की के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हो गई, जिसमें कई छात्र घायल हो गए। कुछ छात्रों को चोटें आने के बाद साथी प्रदर्शनकारी उन्हें कंधों पर उठाकर एंबुलेंस तक ले गए। घायलों में शामिल कुछ छात्रों को प्राथमिक उपचार के बाद छोड़ दिया गया, जबकि कुछ का इलाज जारी बताया जा रहा है। झड़प के बाद कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। छात्रों का आरोप है कि उन्हें शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने से रोका गया, जबकि पुलिस का पक्ष है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भीड़ को नियंत्रित करना जरूरी था। सूत्रों के मुताबिक प्रशासन ने इलाके में अतिरिक्त बल तैनात कर दिया है और ड्रोन से भी निगरानी की जा रही है। घायल छात्रों की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिसके बाद आंदोलन को लेकर सहानुभूति की लहर और तेज हो गई है। कई छात्र संगठनों ने झड़प की निंदा करते हुए जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। पटना तक पहुंची आंदोलन की आंच CJP आंदोलन की आंच अब दिल्ली से निकलकर दूसरे राज्यों तक पहुंच चुकी है। पटना में भी छात्रों ने बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया। बिहार लंबे समय से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों का बड़ा केंद्र रहा है, इसलिए वहां इस मुद्दे को लेकर गुस्सा स्वाभाविक रूप से ज्यादा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पटना में प्रदर्शनकारी छात्रों ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग करते हुए नारेबाजी की। अन्य शहरों में भी छोटे-बड़े प्रदर्शन की खबरें आ रही हैं। विश्वविद्यालय परिसरों में छात्र समूह बैठकें कर रहे हैं और आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक बनाने की रणनीति बना रहे हैं। सोशल मीडिया पर चल रहे अभियानों ने इस आंदोलन को गांव-कस्बों तक पहुंचा दिया है, जहां से भी छात्रों के समर्थन में आवाजें उठ रही हैं। जानकारों का कहना है कि यह आंदोलन इसलिए भी तेजी से फैल रहा है, क्योंकि प्रतियोगी परीक्षाओं की शुचिता का सवाल किसी एक राज्य या वर्ग का नहीं, बल्कि देश के हर उस घर का है, जहां कोई बच्चा किसी परीक्षा की तैयारी कर रहा है। जनता का समर्थन, खाना-पानी भेज रहे लोग इस आंदोलन की सबसे खास तस्वीर वह है, जो जंतर-मंतर पर आम लोगों के सहयोग की है। दिल्ली और आसपास के इलाकों से लोग अपने स्तर पर प्रदर्शनकारी छात्रों के लिए खाना, बिस्किट, पानी की बोतलें, ग्लूकोज़ और दवाइयां लेकर पहुंच रहे हैं। कुछ लोग छाते और तिरपाल का इंतजाम कर रहे हैं, ताकि धूप और बारिश से छात्रों को बचाया जा सके। स्थानीय गुरुद्वारों और सामाजिक संस्थाओं की ओर से लंगर और भंडारे की व्यवस्था किए जाने की खबरें भी सामने आई हैं। प्रदर्शन में शामिल छात्राओं के लिए महिला स्वयंसेवक अलग से सहायता पहुंचा रही हैं। कई पूर्व छात्र, जो अब नौकरीपेशा हैं, अपनी छुट्टी लेकर आंदोलन स्थल पर पहुंचे हैं और व्यवस्थाओं में हाथ बंटा रहे हैं। छात्रों का कहना है कि जनता का यह समर्थन ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि जब समाज साथ खड़ा होता है, तो लड़ाई सिर्फ छात्रों की नहीं रह जाती, वह पूरे देश की बन जाती है। यही भावना इस आंदोलन को लगातार ऊर्जा दे रही है। राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस और तीन मांगें आंदोलन के बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस पूरे मामले पर सरकार को घेरा। उन्होंने सरकार के सामने तीन मांगें रखीं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इन मांगों के केंद्र में छात्रों के साथ न्याय, पूरे मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच तथा जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने जैसे मुद्दे बताए जा रहे हैं। राहुल गांधी ने कहा कि देश के करोड़ों छात्रों का भविष्य दांव पर है और सरकार को इस पर गंभीरता दिखानी होगी। उन्होंने छात्रों के आंदोलन को समर्थन देते हुए कहा कि विपक्ष संसद से सड़क तक छात्रों की आवाज उठाता रहेगा। कांग्रेस के अन्य नेताओं ने भी इस मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राहुल गांधी के इस रुख से आंदोलन को राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में जगह मिल गई है। अब यह मुद्दा सिर्फ छात्रों के प्रदर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि संसद के भीतर भी सरकार और विपक्ष के बीच टकराव का बड़ा कारण बन चुका है। सोनम वांगचुक का समर्थन, स्वास्थ्य को लेकर चर्चा लद्दाख के जाने-माने शिक्षाविद और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी छात्र न्याय आंदोलन को अपना समर्थन दिया है। उनके समर्थन से आंदोलन को नैतिक बल मिला है, क्योंकि वांगचुक की छवि एक गैर-राजनीतिक और सिद्धांतवादी कार्यकर्ता की रही है। छात्रों ने उनके समर्थन का स्वागत करते हुए कहा कि ऐसे व्यक्तित्वों का साथ आंदोलन की विश्वसनीयता बढ़ाता है। इस बीच सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर भी चर्चा तेज है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उनकी सेहत पर लोगों की नजरें टिकी हैं और समर्थक सोशल मीडिया पर उनके स्वास्थ्य की जानकारी साझा कर रहे हैं। आंदोलन स्थल पर मौजूद छात्रों ने उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना की और कहा कि उनका मार्गदर्शन आंदोलन के लिए बेहद अहम है। वांगचुक पहले भी शिक्षा प्रणाली में सुधार को लेकर मुखर रहे हैं। उनका जुड़ना इस बहस को केवल परीक्षा की गड़बड़ी से आगे ले जाकर पूरी शिक्षा व्यवस्था की दिशा पर सोचने की ओर मोड़ सकता है। NEET पेपर लीक से कैसे खड़ा हुआ CJP आंदोलन छात्र न्याय आंदोलन यानी CJP की शुरुआत NEET पेपर लीक के आरोपों के बाद छात्रों के छोटे-छोटे समूहों की नाराजगी से हुई थी। धीरे-धीरे सोशल मीडिया के जरिए अलग-अलग शहरों के छात्र आपस में जुड़ते गए और यह एक संगठित मंच का रूप लेता गया। आज यह आंदोलन देशभर के छात्रों की साझा आवाज बन चुका है। आंदोलन से जुड़े छात्रों का कहना है कि उनकी लड़ाई किसी पार्टी या सरकार के खिलाफ नहीं, बल्कि उस व्यवस्था के खिलाफ है, जिसमें मेहनत करने वाले छात्र ठगा हुआ महसूस करते हैं। उनकी मांग है कि परीक्षा प्रणाली इतनी पारदर्शी और सुरक्षित बनाई जाए कि किसी भी छात्र को अपनी मेहनत पर शक न करना पड़े। यह आंदोलन कई मायनों में खास है। इसमें कोई एक बड़ा चेहरा नहीं, बल्कि सामूहिक नेतृत्व है। फैसले आम सहमति से होते हैं और अनुशासन बनाए रखने पर जोर दिया जाता है। शायद यही वजह है कि इसे समाज के अलग-अलग तबकों से समर्थन मिल रहा है। सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासन का रुख झड़प के बाद जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। सूत्रों के मुताबिक संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त बल तैनात किया गया है और यातायात को वैकल्पिक मार्गों की ओर मोड़ा गया है। प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने की अपील की है। वहीं छात्र संगठनों ने साफ किया है कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा और वे किसी भी तरह की हिंसा का समर्थन नहीं करते। दोनों पक्षों के बीच बातचीत की संभावनाओं पर भी नजरें टिकी हैं, क्योंकि टकराव लंबा खिंचने से स्थिति और जटिल हो सकती है। दिल्ली में प्रदर्शनों का लंबा इतिहास रहा है और जंतर-मंतर लोकतांत्रिक असहमति की सबसे प्रतीकात्मक जगह मानी जाती है। ऐसे में यहां से उठी आवाज का असर दूर तक जाता है, यह बात सरकार और आंदोलनकारी दोनों जानते हैं। आगे क्या होगा आने वाले दिन इस आंदोलन की दिशा तय करेंगे। छात्र संगठनों ने संकेत दिया है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा। दूसरी ओर संसद में भी यह मुद्दा गरमाया हुआ है, जिससे सरकार पर दोहरा दबाव है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार आंदोलन को और राज्यों में विस्तार देने की तैयारी चल रही है। बड़ा सवाल यह है कि सरकार छात्रों से संवाद का रास्ता कब और कैसे खोलती है। अगर जल्द ही विश्वास बहाली के कदम नहीं उठाए गए, तो छात्रों की नाराजगी और गहरी हो सकती है। फिलहाल जंतर-मंतर पर डटे छात्रों का हौसला बुलंद है और उनका कहना है कि यह लड़ाई सिर्फ एक परीक्षा की नहीं, बल्कि देश के हर छात्र के भरोसे की है। द इनसाइड जर्नल इस आंदोलन से जुड़ी हर अहम अपडेट अपने पाठकों तक पहुंचाता रहेगा।








