मंत्री पद दिलाने के नाम पर 3 करोड़ की ठगी: केरल साइबर पुलिस ने दिल्ली से दो आरोपी दबोचे, सांसद के निजी सचिव बनकर करते थे बात
केरल साइबर पुलिस ने एक विधायक और दो सांसदों को मंत्री पद का झांसा देकर तीन करोड़ रुपये ठगने की कोशिश करने वाले दो दिल्ली निवासियों को गिरफ्तार किया है। आरोपी खुद को बड़े नेता का निजी सचिव बताते थे।

तिरुवनंतपुरम: राजनीतिक रसूख और पद का लालच किस तरह ठगी का हथियार बन सकता है, इसका एक चौंकाने वाला उदाहरण केरल से सामने आया है। केरल साइबर पुलिस ने एक बड़े ठगी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दिल्ली के रहने वाले दो लोगों को गिरफ्तार किया है, जिन पर एक विधायक और दो सांसदों को मंत्री पद दिलाने का झांसा देकर तीन करोड़ रुपये ठगने की कोशिश करने का आरोप है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ये आरोपी खुद को एक प्रमुख सांसद का निजी सचिव बताकर पीड़ितों से संपर्क करते थे और उन्हें भरोसा दिलाते थे कि मोटी रकम देने पर उन्हें मंत्री पद दिलवा दिया जाएगा।
फर्जी पहचान का खेल जानकारी के अनुसार आरोपी अपनी बातचीत में बेहद शातिर तरीके अपनाते थे। वे खुद को सत्ता के गलियारों से जुड़ा हुआ बताते और ऊंचे पदों तक अपनी पहुंच का दावा करते थे। पीड़ितों को यकीन दिलाने के लिए वे बड़े नेताओं के नाम का इस्तेमाल करते और खुद को उनके करीबी सहयोगी के रूप में पेश करते थे। इसी झांसे में आकर पीड़ित उनकी बातों पर भरोसा कर बैठे। ठगी की यह रकम कोई छोटी-मोटी नहीं, बल्कि तीन करोड़ रुपये जैसी बड़ी राशि थी, जिससे इस गिरोह की महत्वाकांक्षा और दुस्साहस का अंदाज़ा लगाया जा सकता है।
साइबर पुलिस की सतर्कता से खुला राज़ मामले की शिकायत मिलते ही केरल साइबर पुलिस हरकत में आई और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच शुरू की। कॉल डिटेल, डिजिटल फुटप्रिंट और वित्तीय लेन-देन की बारीकी से पड़ताल के बाद पुलिस आरोपियों तक पहुंचने में कामयाब रही। दोनों आरोपियों को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह के तार और कहां-कहां जुड़े हैं और क्या इनके निशाने पर कोई और भी था।
राजनीति और ठगी का खतरनाक गठजोड़ यह मामला इस बात की ओर भी इशारा करता है कि किस तरह पद और सत्ता का लालच लोगों को आसानी से ठगी का शिकार बना सकता है। जब पीड़ित खुद प्रभावशाली पदों पर हों, तब भी अगर वे ऐसे झांसे में आ जाएं, तो यह पूरे तंत्र के लिए एक गंभीर चेतावनी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह के अपराध न सिर्फ आर्थिक नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करते हैं।
बढ़ते साइबर अपराध पिछले कुछ वर्षों में साइबर अपराध के मामलों में तेज़ी से वृद्धि हुई है। ठग लगातार नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं—कभी नौकरी दिलाने के नाम पर, कभी निवेश में मोटे मुनाफे का लालच देकर, तो कभी फर्जी पहचान बनाकर। यह ताज़ा मामला दिखाता है कि ठगों की पहुंच अब सिर्फ आम लोगों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि वे बड़े पदों पर बैठे लोगों को भी निशाना बना रहे हैं। ऐसे में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।
सावधानी ज़रूरी पुलिस और साइबर विशेषज्ञ लोगों से अपील करते हैं कि किसी भी अनजान व्यक्ति के दावों पर आंख मूंदकर भरोसा न करें, खासकर जब बात बड़ी रकम के लेन-देन की हो। किसी भी संदिग्ध कॉल या संदेश की तुरंत जांच करें और आधिकारिक माध्यमों से पुष्टि किए बिना कोई भी भुगतान न करें। अगर कोई व्यक्ति खुद को किसी बड़े नेता या अधिकारी का प्रतिनिधि बताकर पैसों की मांग करे, तो यह ठगी का साफ संकेत हो सकता है।
केरल साइबर पुलिस की इस कार्रवाई की चारों ओर सराहना हो रही है, क्योंकि इसने न सिर्फ एक बड़ी ठगी को नाकाम किया, बल्कि यह संदेश भी दिया कि कानून के लंबे हाथ अपराधियों तक ज़रूर पहुंचते हैं। द इनसाइड जर्नल की टीम इस मामले की आगे की जांच पर नज़र बनाए हुए है और हर नई जानकारी आप तक पहुंचाती रहेगी। पाठकों से हमारी अपील है कि साइबर ठगी से बचने के लिए हमेशा सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।

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